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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 50, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 50, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 50 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । एतेषां भगवन्भेदो बोधाय मम कथ्यताम् । जीवानां सप्तरूपाणां जलानामर्णवेष्विव ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे भगवन्‌, जैसे क्षीरसागर आदि सात समुद्रों में क्षीर आदि के रस से युक्त जल ही सात तरह के हैं, वैसे ही सात प्रकार के रूपों को धारण कर रहे इन जीवों का जो स्वरूप है, वह जानने के लिए मुझसे कहिए