Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 50, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 50, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 50 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
ये स्वप्नमभिपश्यन्ति तेषां स्वप्नमिदं जगत् ।
विद्धि ते हि खलूच्यन्ते जीविकाः स्वप्नजागराः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
गाढ़ी नींद में सोये हुए उन जीवों में जो जीव स्वप्न देखते हैं, उन्ीका
स्वप्न यह जगत है, यह आप जानिए । उन्हींका नाम स्वप्नजाग्रत कहा जाता है