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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 51, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 51, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

सम्यग्ज्ञानेन भूतानि ज्ञस्य देहतया सह । पीठबन्धं विमुञ्चन्ति गतकाल इवाम्बुदाः ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

सम्यक्‌ ज्ञान से यानी आत्मा के सत्यज्ञान से देहरूप के साथ ये सब भूत ज्ञानी के पिण्ड को समूल ऐसे छोड़ देते है जैसे वर्षाकाल के जाने पर मेघ