Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 51, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 51, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
यथा गलितुमारब्धो घनो गगनतामियात् ।
तथा सत्यावबोधेन शाम्येत्सात्मग्रहं जगत् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे विनाश की ओर उन्मुख हुआ
मेघ तत्काल ही गगनरूप बन जाता है, वैसे ही आत्मज्ञान से यह अहंकारसहित जगत शान्त हो
जाता है यानी तत्काल आत्मरूप बन जाता है