Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 51, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 51, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
बोधेन तनुतामेति पिण्डबन्धो जगत्त्रये ।
पिशाचबुद्धिः सदने बोधितस्य यथा शिशोः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
तीनों जगत् में जो एक प्रकार का रूप कल्पित किया गया है, वह
तत्त्वज्ञान से धीरे-धीरे ऐसे विलीन होता जाता है, जैसे घर में समझाये गये बालक का वृक्षादि में
से पिशाचज्ञान धीरे-धीरे विलीन होता जाता है