Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 51, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 51, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
रसे नीरसतां याते वासना प्रविलीयते ।
शिखायां प्रविलीनायां प्रदीपस्यांशवो यथा ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
दीपकी शिखा जब
नष्ट हो जाती है, तब उसकी किरणें जैसे नष्ट हो जाती है, वैसे ही जब रस नीरसरूप बन जाता
है, तब ज्ञानी की वासना नष्ट हो जाती है