Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 51, Verse 47
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 51, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
अस्तंगतमना मौनी निरोधपदवीं गतः ।
तीर्णः संसारजलधेः कर्मणामन्तमागतः ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, जिसका मन मर गया है और जो सर्वबाधावधि आत्मपद
को प्राप्त हुआ है, ऐसा मननशील मौनी संसाररूपी समुद्र को तैर गया है और सब कर्मों के
अन्त को भी प्राप्त हो गया है, यह अवश्य जानिए