Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 52, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 52, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
देशकालक्रियात्मैकं यथादृष्टमिह स्थितम् ।
बीजमेवैककर्मातो न घटः पटकार्यकृत् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
द्ष्टान्त में कहे यये कार्यकारणभावोच्छेद को दाष्टान्तिक मे दिखलाते हैं /
यदि प्रलय, सृष्टि आदि तथा देशकाल एवं क्रियात्मक यथादृष्ट एक सन्मात्र ही बीज को
स्वस्वरूप में स्थित स्वीकार करेंगे, तब तो वह एक स्वयं ही क्रिया और उसका फल होता हुआ
कुछ नहीं कर सकता, क्योकि वैसा करने में वह असमर्थ है-पटकार्य करने में असमर्थ घट
पटरूप कार्य नहीं करता (५)