Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 52, Verse 46
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 52, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
निखाता दृश्यतां यान्ति स्तम्भस्थाः शालभञ्जिकाः ।
अस्मिन्नक्षोभ्य एवान्तस्तरङ्गाः सृष्टिदृष्टयः ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
स्तम्भ में स्थित जो प्रतिमाएँ उत्कीर्ण होती हैं वे ही दृष्टिगोचर होती हैं किन्तु ब्रह्म में तो उसके
शान्त क्षोभरहित स्थित रहने पर ही उसके भीतर सृष्टि के विवर्तरूप तरंगे दृष्टिगोचर होती
हैं