Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 53, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 53, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
न च नास्तीति तद्वक्तुं युज्यते चिद्वपुर्यदा ।
न चैवास्तीति तद्वक्तुं युक्तं शान्तमलं तदा ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
वह जब चेतन शरीररूप से भासने लग
जाता है, तब उसकी चारों ओर सत्ता होने के कारण “नहीं है” ऐसा नहीं कहा जा सकता और
जब शान्तमल (अज्ञान मलादि से वर्जित) होकर अनुभव में आता है, तब “वह है' यों भी
वाच्यवृत्ति से नहीं कहा जा सकता