Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 54, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 54, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 54 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
यस्त्वकारणको भाति स स्वभावो विजृम्भते ।
सर्वरूपेण संकल्पगन्धर्वनगरादिवत् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
जो अकारण भासता
है, वह द्रष्टारूप चैतन्य ही अपने स्वरूप का त्यागकर सब रूप से उस प्रकार भासता है, जिस
प्रकार संकल्प से गन्धर्वनगर आदि भासते हैं