Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 54, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 54, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 54 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

न ज्ञत्वं न च कर्तृत्वं न जडत्वं न भोक्तृता । न शून्यता न चार्थत्वमिह नापि नभोर्थता ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

इस्री दृष्टि से सम्पूर्ण जगत्‌ की विचित्रता हटाई जा सकती है, यह कहते हैं / न तो ज्ञातापन, न कर्तापन, न जड़पन, न भोक्तापन, न शून्यपन, न अर्थपन और न आकाशपन ही इस ब्रह्म में रहता है