Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 54, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 54, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 54 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
मरणं जीवितं सत्यमसत्यं च शुभाशुभम् ।
सर्वमेकमजं व्योम वीचिजालजलं यथा ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
जीवन, मरण, सत्य, असत्य, शुभ, अशुभ
जो कुछ है वह सब एक, अज निर्मल चिदाकाशरूप ऐसे है, जैसे तरंगों का समूह जलरूप