Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 54, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 54, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 54 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

एवमच्छं पराकाशे स्वप्नपत्तनवज्जगत् । भाति प्रथममेवेदं ब्रह्मैवेत्थमतः स्थितम् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

इस तरह जगत्‌ स्वच्छ ब्रह्मरूप ही सिद्ध हुआ, वही स्वप्ननगर के सदृश परम चिदात्मरूप निर्मल आकाश में भासता है, अतः प्रथम निष्प्रपंच जो ब्रह्म है, वही जीवात्मक विभाग से इस जगद्रूप से स्थित है, हे श्रीरामजी, यह आप अवश्य जान लें