Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 56, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
किमिदं दृश्यते किं वा प्रेक्षते कोऽहमेव वा ।
सर्व शान्तमजं व्योम चिन्मात्रात्मनि रिङ्गकम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
यह क्या दिखाई देता है, कौन देखनेवाला है और मैं
ही कौन हूँ अर्थात् ये सब तुच्छ हैं । कोई नहीं है, सब कुछ शान्त, अज चिदाकाशरूप ही
केवल चिदाकाश में थोड़ा-सा रेंगने वाला विवर्त बन गया है