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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 56, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

उद्वेगं जनयत्यन्तस्तीव्रसंवेगखेदतः । इमा दृश्यदृशो द्रष्टुरिष्टानिष्टफलप्रदाः ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

लोकस्थिति छुखद नहीं है, इतनी ही बात नहीं है किन्तु असीम दुःखदायी भी है, यह कहते हैं / तीव्र खलबली और खेद उत्पन्नकर ये इष्ट-अनिष्ट फल देने वाली दृश्यदृष्टियाँ द्रष्टा के भीतर उद्वेग ही उत्पन्न करती हैं