Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verses 11–12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 56, verses 11–12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 11,12
संस्कृत श्लोक
तस्मात्समस्तसिद्धेन्द्रदेवदैत्यादिदुर्गमम् ।
सुप्रदेशमितो गत्वा संगोप्यात्मानमात्मना ॥ ११ ॥
अदृश्यः सर्वभूतानां निर्विकल्पसमाधिगः ।
समे स्वच्छे पदे शान्ते आसे विगतवेदनम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी, यह सब
विचारकर अन्त में उसीके कारण समस्त सिद्ध, इन्द्र, देव, दैत्य आदि द्वारा दुर्गम एक अच्छे
प्रदेश में जाकर अपनी देह को अपने आप ही अन्तर्धान के उपायों से छिपाकर (सुरक्षित
बनाकर) मैं सब प्राणियों की आँखों से ओझल हो जाऊँ और निर्विकल्प समाधि लगाकर
एकरूप अद्वितीय स्वच्छ शान्त पद में सब विकल्पों से निर्मुक्त हो स्थित हो जाऊँ