Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 57, Verse 16

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 57, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 57 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

सम एव चिदाकाशः कचत्यात्मनि तत्तथा । स्वभाव एव सर्गाख्यश्चित्त्वाच्चैतन्यमीश्वरः ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

तब क्या एकमात्र शून्य ही जृष्टिकप से भासित होता है इस पर नहीं यह उत्तर देते हैं / विषयसृष्टि के आकार से रहित चिदाकाश ईश्वर ही अपने स्वभाव में सृष्टिरूप से स्फुरित होता है । सर्गनामक चितिस्वभाव ही चिद्रूप होने के कारण ईश्वर चैतन्य है, इसलिए चिति ही सृष्टिरूप से भासित होती है, न कि शून्य