Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 57, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 57, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 57 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
इति मेऽहंकृतेस्त्यागे रागे च समता यदा ।
तदा व्योम्न इवाव्योम्नः सर्गे सर्गे च मे स्थितिः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार समाधिकाल में अहंकार के त्याग तथा
व्यवहारकाल में उसके राग में जब मेरी समता है तब सृष्टि की विद्यमान तथा अविद्यमान दशा में
मेरी स्थिति ऐसी है, जैसी मेघ, वायु तथा धूप आदि से अवकाशशून्य आकाश की