Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 59
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 59, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 59
संस्कृत श्लोक
आभासमात्ररूपाणि तेजस्यात्मविवस्वतः ।
जातानीव स्वतस्तानि स्पन्दनानि नभस्वतः ॥ ५९ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मारूपी सूर्य के तेज के अन्दर
वे केवल आभासरूप हैं ओर वायु से स्पन्दन की तरह वे सब स्वतः उत्पन्न हुए हैं