Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 6, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
वधूमुखौषधीपुष्पसमालम्भनभूमयः ।
अनुभूता मुने गन्धा मन्दानिलसमीरिताः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुने, सुन्दर स्त्रियों के मुख,
चन्दन, खस, अगुरु आदि औषधियाँ अनेक तरह के फूल तथा ढेर-के-ढेर कपूर,कस्तूरी आदि के
मिश्रण इन सबकी मन्द-मन्द बह रही वायु से प्रेरित गन्धं का मैं बहुत अनुभव कर चुका हूँ