Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 6, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
भुक्त्वा वर्षसहस्राणि दुर्भोगपटलीमिमाम् ।
आब्रह्मस्तम्बपर्यन्तं न तृप्तिरुपजायते ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
तृण, गुल्म आदि से लेकर
ब्रह्मापर्यन्त के परिणाम में दुःखदायक विषयों का मैंने हजारों वर्षों तक अच्छी तरह भोग किया,
लेकिन हे भगवन्, फिर भी मुझे तृप्ति नहीं हो रही है