Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 6, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
साम्राज्यं सुचिरं कृत्वा तथा भुक्त्वा वधूगणम् ।
भंक्त्वा परबलान्युच्चैः किमपूर्वमवाप्यते ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
चिरकाल तक निष्कपट राज्य करके,
अनेक सुन्दरियों का भोग करके तथा शत्रुओं के सैन्य को खूब चूर्ण-चूर्ण करके भी हे भगवन्, मनुष्य
अपूर्व कौन-सा पदार्थ पा जाता हैं ? मेरी समझ में तो उसे नई कोई चीज नहीं मिलती