Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 6, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
घनास्फोटान्यसाराणि मलिनानि जडानि च ।
विद्युत्प्रकाशान्येतानि भीमाभ्राणीन्द्रियाणि च ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
घन आस्फोटवाले असार, मलिन, जड़ और विद्युत्
प्रकाशवाले (८) ये भयंकर मेघ और इन्द्रियसमुदाय तुल्य हैं