Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 54
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 6, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
क्षुद्रप्राणिगृहीतानि वर्जितानि कृतात्मभिः ।
रजस्तमोभिभूतानि स्वेन्द्रियाण्यवटानि च ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
क्षुद्र प्राणियों से गृहीत,
महात्माओं से वर्जित तथा रज और तम से अभिभूत (%) अपनी ये इन्द्रियाँ और कुपथ समान
हैं