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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 56

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 6, verse 56 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 56

संस्कृत श्लोक

आत्मंभरीण्यनार्याणि साहसैकरतानि च । अन्धकारविहारीणि रक्षांसि स्वेन्द्रियाणि च ॥ ५६ ॥

हिन्दी अर्थ

हे महामुने, अपने पेट पालने में प्रवीण, अनार्य, एकमात्र साहस मेँ निरत और अन्धकार में विचरणशील ये राक्षस और इन्द्र्यो तुल्य ही हैं