Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 60, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
तेषु नामानुभूयन्ते जगल्लक्षेषु तत्र वै ।
उष्णानि चन्द्रबिम्बानि सूर्याः शीतलमूर्तयः ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
जग्रत् चिद्रूप ही है, तब चन्द्र शीतल और सूर्य यरम क्यो 2 उलटा भी हो सकता है, यदि यह
कहें. तो यह इष्ट ही है क्योकि किसी ब्रह्मांड में वैसा भी देखने में आया हैं, यों कहते हैं ।
भद्र, जो लाखों जगत् समाधि में अनुभूत होते हैं, उनमें कहीं पर चन्द्रबिम्ब गरम और सूर्यविम्ब
ठण्डे भी अनुभूत होते हैं और इसी तरह के हैं भी