Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 57
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 60, verse 57 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 57
संस्कृत श्लोक
भूमयान्येकनिष्ठानि निष्पिण्डान्येव कानिचित् ।
कानिचिद्वारिपूर्णानि वह्निपूर्णानि कानिचित् ॥ ५७ ॥
हिन्दी अर्थ
कुछ जगत् तो केवल भूमिमय है, उनकी स्थिति एक-सी है, कुछ घनता से
रहित हैं, कुछ केवल जल से भरे हैं और कुछ अग्नि से पूर्ण हैं