Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 63

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 60, verse 63 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 63

संस्कृत श्लोक

अन्येषु व्योममात्रात्मदेहेषु व्योमरूपिणः । प्राणिनः सन्ति सर्गेषु दर्शनव्यवहारिणः ॥ ६३ ॥

हिन्दी अर्थ

अन्य जो केवल वायु से पूर्ण जगत्‌ है, उनमें जो भूत हैं वे जल, अग्नि आदि से यद्यपि रहित हैं, तथापि केवल वायुरूप होकर ही, अर्जुननामक वायु के (रोगविशेष के) सदृश, घूमते फिरते हैं। (अर्वा से ग्रस्त लोक आकाश में घूमते हैं; यह कहीं परर प्रणिद्ध हैं) ॥६ २॥ जो दूसरे केवल आकाशरूप अपनी देह से युक्त लोक हैं, उनमें भी आकाशरूप ही प्राणी हैं और वे सबके सब दर्शनव्यवहार करनेवाले हैं