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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 61, Verse 17

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 61, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 61 · श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

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हिन्दी अर्थ

द्व्य और अदृश्य का भेद कैसे हैं 2 इस पर कहते है/ निरन्तर ही एकस्वरूपवाले अवयव और अवयवियों में, चाहे वे दृश्यरूप हो या अदृश्यरूप, किसी समय भी भेद नहीं रहता