Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 61, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 61, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 61 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
तब क्या ब्रह्म मे कल्पित सृष्टि, प्रलय आदि सत्य हैं ? इस प्रश्न का नकारात्मक उत्तर देते हैं /
यद्यपि ऐसा (सृष्टि की ब्रह्ममयता) है, तथापि परम ब्रह्मरूप आकाश में सृष्टि, महाप्रलय
आदि कोई भी रंग ऐसे नहीं हैं, जैसे चन्द्रबिम्ब मेँ कलंकशन्यता