Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 61, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 61, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 61 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, सम्पूर्ण मलों से
रहित परम चिदाकाश में कहाँ सृष्टि-प्रलय के कलंक, कहाँ आदि, मध्य ओर अन्त की कल्पना
तथा कहाँ लोकान्तरों के विभ्रम ?