Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 62, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 62, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 62 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
यथा भूमण्डलं भावान्निधिधातुरसादिकान् ।
वेत्त्येवं तन्मया बुद्धमनन्यदृश्यमात्मनः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे पृथ्वीमंडल का अभिमानी जीव
पृथ्वी पर के निधि, धातु, रस आदि सभी पदार्थों को जानता है, वैसे ही भने अपने से अभिन्न
सम्पूर्ण दृश्य समूह को जाना