Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 63, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 63, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 63 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

तदेन्दुकार्ष्ण्यखतनुशिलागेयादितां गताः । इवाभान्ति चिदाकाशास्तथा देहरवादयः ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे नेत्ररोग के कारण चन्द्रमा में कालापन, आकाश में साकारता, पत्थर की मूर्ति आदिमें गीत आदि ये सब प्रातिभासिक अर्थता को प्राप्त चिदाकाशरूप ही है, वैसे ही स्वाप्निक देह तथा शब्द आदि भी तत्तत्‌ ज्ञात वस्तु के संस्कारों से उपहित चिदाकाशरूप ही होकर अवभासते हैं