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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

का त्वं कमलगर्भाभे किमर्थं मामुपागता । कस्यासि किं प्रार्थयसे क्व गतासि किमास्पदा ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

कमल के गर्भ के सदृश कोमल तथा सुन्दर रूपवाली हे ललने, तुम कौन हो, मेरे पास क्यों आई हो, तुम किसकी लड़की और किसकी भार्या हो, क्या चाहती हो, कहाँ जी रही हो, तुम कहाँ की रहनेवाली हो ?