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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 28

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

क्वचिदुत्पतदुत्पाततया नश्यज्जनावनिः । क्वचित्सौराज्यसंपत्त्या प्रोद्भवत्पुरमण्डलः ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

कहीं पर उत्पन्न हो रहे बड़े-बड़े उत्पातां के कारण उसकी भूमि मनुष्यों के विनाश से भयप्रद है, तो कहीं पर उत्तम राज्य-सम्पत्ति से बसाये जा रहे नगरों के कारण हर्षप्रद भी है