Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
क्वचिदत्यन्तनिःशून्यः क्वचिज्जनपदावृतः ।
क्वचिच्छ्वभ्रान्तगम्भीरः क्वचित्पातालभीषणः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर अत्यन्त शून्य ही है, कहीं पर जनपदों से आक्रान्त हैं । कहीं पर
जलपूर्णं महाद्वन्द्वों के कारण गम्भीर हैं, तो कहींपर शुष्क पातालों के कारण भीषण है