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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 30

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 30

संस्कृत श्लोक

क्वचिद्बृहत्कल्पतरुः क्वचिन्निर्जलजङ्गमः । क्वचिन्महाकरिकुलः क्वचिन्मत्तहरिव्रजः ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

कहीं पर उसमें बड़े-बड़े कल्पतरु वृक्ष हैं, कहीं पर वह जलरहित हैं, कहींपर चलने-फिरनेवाले प्राणी भरे पड़े हैं, कहीं पर बड़े-बड़े हाथियों के झुण्ड के झुण्ड हैं, कहीं पर प्रमत्त सिह, वानर आदि हैं