Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
क्षीरोदकार्कगौरीणां वनस्कन्धौकसामिव ।
विश्राम्यन्त्यनिशं यासु हरयो हरियोनयः ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुने, क्षीरसागर और सूर्य के सदृश गौरवर्ण उन शिखरस्थ शिलाओं के ऊपर पुत्र, पौत्र आदि
परिवार के साथ सिह, वानर आदि ऐसे रात-दिन विश्राम करते है, जैसे जंगल के बड़े वृक्षों की
शाखाओं पर