Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
अद्याप्यात्मैकदोषेण न हि मोक्षं लभावहे ।
चिरं तत्रैव तिष्ठावस्तथैवाबद्धभावनौ ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
आज भी हम दोनों अपने एकमात्र कामरूप दोष से मोक्ष प्राप्त नहीं कर रहे हैं और उसी
तरह एक दुसरे में सरसता बाँधे हुए दीर्घकाल से बस रहे हैं