Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
पाषाणसंकटे तस्मिन्बद्धावावां न केवलम् ।
बद्धो यावदशेषेण परिवारोऽपि तत्र नौ ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज, उस पाषाण के संकट
में हम दोनों ही बद्ध नहीं हैं, किन्तु हम लोगों का पुत्र, पौत्र, आदि परिवार भी उसमें पूर्णरूप से वेधा
हुआ है