Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
पुराणपुरुषो बद्धो द्विजस्तत्रास्ति मे पतिः ।
एकस्थानान्न चलति जीवन्युगशतान्यसौ ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
भगवन्, उसमें बंधा हुआ मेरा पति द्विजकुलोत्पन्न और बड़ा ही प्राचीन पुरुष है ।
वह यद्यपि सैकड़ों वर्षों से जी रहा है, तथापि अपने आसन से उठता ही नहीं