Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 56
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 56 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
अथाहं तरुणी जाता समुद्भिन्नोन्नतस्तनी ।
लतोल्ललद्गुलुच्छेव विलासरसशालिनी ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर मे पूर्ण युवती हो गई,
मेरे वक्षःस्थलपर महान् उन्नत स्तन हो आये । अब मेँ अपने विलासरूप रस से ऐसे शोभित हू.
जैसे कि उल्लसित हो रहे फल-पुष्पों के गुच्छो से लता