Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 57
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 57 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 57
संस्कृत श्लोक
पतिर्मा दीर्घसूत्रत्वाच्छ्रोत्रियत्वात्तपोरतः ।
कयाप्यपेक्षयाद्यापि न विवाहितवानिमाम् ॥ ५७ ॥
हिन्दी अर्थ
मेरे पतिदेव तो दीर्घसूत्री (आलसी),
स्वाध्याय में निरत और बड़े तपस्वी हैं, किसी अज्ञात अपेक्षा से आज तक भी इस गुणसम्पन्न
रमणी के साथ उन्होने विवाह नहीं किया