Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 59
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 59
संस्कृत श्लोक
शीतानिलविलोलासु नलिनीषु निरन्तरम् ।
अङ्गदाहमवाप्नोमि पूताङ्गारस्थलीष्विव ॥ ५९ ॥
हिन्दी अर्थ
मैं शीतपवन के कारण चंचल हुई कमलिनियों मे भी रात-दिन ऐसे अंगदाह का अनुभव करती हूँ,
जैसे कि राख आदि को हटाकर तेज किये गये अंगारों के स्थानों मे