Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 63
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 63 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 63
संस्कृत श्लोक
कुमुदोत्पलकह्लारकदलीतल्पपालयः ।
मदङ्गसङ्गमाद्ग्रीष्ममर्मरा याति भस्मताम् ॥ ६३ ॥
हिन्दी अर्थ
कुई, नीलरक्त,
कहूलार, कदली आदि की शब्याएँ मेरे अंग के स्पर्शमात्र से जनित ताप से - गर्मी से पहले तो सूख
जाती है, फिर मर्मर होकर भस्म हो जाती हैं