Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 65, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 65, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 65 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
तेनासौ मत्पतिर्विद्वानपि न प्राप्तवान्पदम् ।
अद्य सोऽहं च वाञ्छावः प्रयत्नेन परं पदम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रयत्नपूर्वक) आत्मवस्तु की चाह कर रहे हैं