Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 65, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 65, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 65 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
तदेतामर्थिता ब्रह्मन्सफलां कर्तुमर्हसि ।
महतामर्थिनो व्यर्था न कदाचन केचन ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
अतः हे ब्रह्मन्, आप हम लोगों की प्रार्थना को
सफल करने के लिए सर्वथा समर्थ हैं, बड़े लोगों के सम्मुख आये हुए कोई भी प्रार्थी कभी निष्फल
होकर नहीं जाते