Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 66, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 66, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 66 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
ससुरासुरगन्धर्वाः कालः कलयति प्रजाः ।
दोर्भिः कल्पयुगाब्दैश्च स्वपशूनिव पालकः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
पशुपालक अपने पशुओं को