Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 66, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 66, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 66 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
चतुर्दशविधा वातवेल्लिता भूतपांसवः ।
नाशाकाशे विलीयन्ते शरदम्भोदलीलया ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
जिसमें सभी वस्तुओं का विनाश हो जाता है, ऐसे अव्याकृत आकाश में वायु
से उड़ाये गये चौदह प्रकार के प्राणी के प्राणरूपी रजकण, शरत्काल के मेघो के सदुश, विलीन
हो जाते हैं